झूठ से बचा रहे, छोड़ न सच को पाठ मन मुटाव का, हमको न पढ़ा। झूठ से बचा रहे, छोड़ न सच को पाठ मन मुटाव का, हमको न पढ़ा।
बारंबार प्रणाम भारत देश को करते हैं। बारंबार प्रणाम भारत देश को करते हैं।
समझों न तुम इसे कथा-कहानी, ये है मेरी प्रेम व्यथा पुरानी| मैं बनके खुद श्याम, चाहता हूँ तुम्हें राधा... समझों न तुम इसे कथा-कहानी, ये है मेरी प्रेम व्यथा पुरानी| मैं बनके खुद श्याम, चा...
समय के चलते चलतेहालात बदलते बदलतेये कहाँ आ गये हम समय के चलते चलतेहालात बदलते बदलतेये कहाँ आ गये हम
और हम उनकी यादों में खोये रहते हैं... और हम उनकी यादों में खोये रहते हैं...
स्वच्छ बनायें। स्वच्छ बनायें।